Sunday, 17 May 2015

मोदी सरकार का एक साल और मेरे विचार

16 मई 2014 सुबह 09 बजे अपने हॉस्टल के सामने नॉएडा में के जब मैंने
पहला पटाखा मोदी जी के नाम का फोड़ा था तब
शहरी कॉलोनियों की मनहूसियत में पहला आदमी जो
दौड़ कर मेरे पास आया था वो था एक सामने बन रहे
अपार्टमेंट में काम करता मज़दूर , आते ही पूछा था उसने "
कौन जीता , मोड़ी मोड़ी ? " , मैंने कहाँ " हाँ मोड़ी ही
जीता" , मुझसे आगे बिना बात किये ही वो भागकर फिर
बिल्डिंग में गया और चिल्ला चिल्लाकर बोला "मोड़ी
मोड़ी" , एक पल के लिए मेरी ख़ुशी फीकी पड़ गयी थी
उसकी ख़ुशी के सामने , मेरे लिए तो जश्न मनाने के सैकड़ों
बहाने थे , इकॉनमी के सुधरने की चाहत थी, टैक्स कम हो
जाने का लालच था , हिंदुत्व का उद्भव और जेहादियों के
संहार की आशा थी, भारत का मस्तक विश्व पटल पर ऊंचा
होने की उम्मीदें थीं , पर उसके पास क्या था ? क्यों जश्न
मना रहा था वो ? ऐसा तो कोई लालच सीधा मुझे समझ
नहीं आया और शायद इसीलिये जब बाजार से मिठाई
लाया तो अपने भावी पत्रकार मित्रों के साथ साथ मिठाई को उन
मजदूरों में भी बाँटा क्योंकि उनकी ख़ुशी सही
मायने में निस्वार्थ थी !!
खैर, आज एक साल बाद हम कहाँ हैं इसका सही एहसास करने
के लिए हमें थोड़ा फ्लेशबैक में जाना पड़ेगा , याद करिये जब
मनमोहन सिंह ने संसद में जवानों की शहादत के मुद्दे पर कहा
था की " ऐसे छोटे मोटे मुद्दों को संसद में लाकर उसका समय
बर्बाद नहीं करना चाहिए ? " , याद है संयुक्त राष्ट्र में
हमारा विदेश मंत्री किसी और देश के प्रमुख की स्पीच पढ़
डालता था ?
याद है मनमोहन सिंह ने मुसलमानों का
आव्हान किया था की देश के संसाधनों पर पहला हक़
उनका है ?
याद है जब सलमान खुर्शीद ने भारतीय सैनिकों
के सर मांगने की बजाये पाकिस्तानियों को बिरयानी
की दावत दी थी ?
याद है वो ज़ीरो लोस थ्योरी ?
याद है वो अरबों के घोटाले ?
याद है वो चीन कीहिमाकत ?
याद है वो विदेशी फंड से संचालित एनजीओ का देश विरोधी कार्यक्रम ? भूल गए क्या ? अच्छे दिनों में
याददाश्त कमज़ोर तो नहीं हो गयी ?
मोदी ने क्या किया है ये हम सबके सामने है और पूरे साल
उसी पर लिखा है पर उन्हें और क्या करना है , आज इस पर
लिखना चाहता हूँ , देश के तमाम प्रकार के लोग मोदी जी
से कुछ चाहते हैं , उन तमाम तरह के लोगों का एक छोटा सा
हिस्सा मेरे अंदर भी है और उसी को आगे शब्दों में प्रकट कर
दस में से नंबर भी दूंगा !!
एक हिन्दू के रूप में
==
पहले तो हम हिन्दुओं को इस गलतफहमी से बाहर आना
चाहिए की मोदी कोई हिन्दू ह्रदय सम्राट हैं , गुजरात से
मोदी जी को करीब से जानने वाले इसे समझेंगे , वे बेहद
चतुराई और बारीकी से हिन्दुओं की भावनाओं को
उत्सर्जित करने की क्षमता रखते हैं और उसका सही जगह और
सही समय पर दोहन करते हैं , जिसमे कोई बुराई भी नहीं या
ऐसा करने से उनकी नियत भी ख़राब नहीं कही जा सकती
बशर्ते वे सिर्फ इसी स्तर पर ना रहकर हिन्दुओं के कई
स्थापित मुद्दों को सुलझाने का प्रयास भी दिखाएँ , कम
से कम मंशा तो दिखाएँ !! जब पहली बार भारत के
प्रधानमंत्री को पशुपतिनाथ के मंदिर के बाहर रुद्राक्ष
की माला पहने और सर पर तिलक लगा देखा था तो मन
प्रफुल्लित हो उठा था , जब पहली बार प्रधानमंत्री
निवास में इफ्तार पार्टी की जगह संक्रांति मिलन रखा
गया तब भी दिल को सुकून पहुंचा था , वैदिक विज्ञान पर रिसर्च की पहल और भारत के इतिहास को मार्क्सवादी
रंग से साफ़ करने की जोरदार मुहीम भी सराहनीय है , पर
मुद्दे इन्ही सतही भंगिमाओं से सुलझ जाते तो क्या बात
थी , आप एक चर्च में चोरी की घटना पर एसआईटी बिठा दें
और पूरी ट्रेन की बोगी जलाने के कुत्सित प्रयास पर चुप बैठे
रहें ये हज़म नहीं होता ? आप पुणे के एक अल्पसंख्यक के मरने पर
हायतौबा मचा दें और केरल बंगाल में मरते हिन्दुओं पर कुछ
ना करें, ना बोलें ? ये सब घटनाएं मोदी जी पर अविश्वास
नहीं तो कम से कम दिमाग में अस्थिरता तो पैदा करती
ही है, इसमें अड़चन ये भी है की हिन्दू भाजपा के ऊपर बूढ़े माँ
बाप की तरह आश्रित हैं , आज की परिस्थिति में उन्हें अपने
मुद्दों को और हठ के साथ मनवाना होगा वर्ना सरकारें
आएँगी और अपने मतलब साध कर गर्त में जाती जाएंगी !! !!
लेकिन इन सबके बीच ख्वाजा मोइद्दीन चिश्ती जैसे व्यक्ति की अजमेर स्थित दरगाह पर चादर भेजकर  तुष्टिकरण की राजनीति को नया आयाम दिया।
यदि वो चादर असफाक उल्ला खान की शहादत स्थल पर भेजी गयी होती तो मेरा सर फक्र से ऊँचा हो जाता।
खैर एक हिन्दू के नाते दस में से छह अंक देना चाहूंगा !!

एक अल्पसंख्यक के रूप में
===
चाहे ईसाई हो या मुस्लिम उनके लिए मोदी का कुछ भी
करना या उन्हें बार बार चीख चीख कर शर्मिंदगी से भरी
भावना के साथ ये कहना की संविधान ही मेरा धर्म ग्रन्थ
है चुनावी राजनीति में कोई फर्क नहीं डालने वाला , कहते
हैं ना की जैसे चलनी में पानी इकट्ठे करने जैसा !! ज्यादातर
ईसाई पूरी शक्ति के साथ मिशनरियों के धर्म परिवर्तन
मुहीम का खुलेआम समर्थन करते है, उन्हें पता है मोदी और
उनकी विचारधारा हमेशा इसके आड़े आएगी इसलिए वे पूरी
शक्ति के साथ कभी मोदी को सत्ता में वापस नहीं आने
देंगे !! ज्यादातर मुस्लिम दिन रात गज़वा ए हिन्द का
ख्वाब देखते है , अंतर सिर्फ इतना है की कुछ सिर्फ ख्वाब
देखते हैं और बाहर शालीन और सेक्युलर बने रहते हैं , जबकि कुछ
खुलेआम देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं , सपने
सबके एक हैं , यहाँ भी मोदी हर मुस्लिम को अपनी
योजनाओं से करोड़पति भी कर दे तो भी उसके वो सपने
नहीं बदलने वाले , मुस्लिमों के कल्याण और उन्हें
राष्ट्रवादी धारा से जोड़ने के लिए सरकारी योजनाओं
की नहीं , समुदाय के राष्ट्रवादी सोच वाले नेताओं को
ऊपर लाने , मदरसों पर प्रतिबन्ध और नसबंदी की ज़रुरत है जो
उन्हें कोई सरकार देने की हिम्मत नहीं रखती , इस वर्ग के
लोग लगातार "बरातियों" की तरह आप पर सेक्युलर रहने और
उनके हित में काम करने का दबाव मचाएंगे, रोना भी रोयेंगे ,
देश को बदनाम करने तक से पीछे नहीं हटेंगे पर आपके कितना
भी करने पर वोट वहीँ देंगे जहाँ देते आये हैं .... भाजपा उनके
लिए जान भी हाज़िर कर दे तो भी शून्य बटे सन्नाटा ही
रहेगा ,इसलिए अपनी शक्ति उन्हें खुश करने की बजाये देश की
सांस्कृतिक रीढ़ को मजबूत करने लगाएं तो बेहतर होगा ,
कारवां बनेगा तो ये भी जुड़ ही जायेंगे !! दस में से तीन अंक
दूंगा !!

एक गरीब / किसान के रूप में
====
गरीबों के लिए इतनी योजनाएं लाने के बाद भी आपकी
छवि "नव धनाढ्य" की बनी है ,ऐसा व्यक्ति जो अचानक
आये धन से अपनी लाइफस्टाइल में आमूलचूल परिवर्तन कर दे
या जिससे अचानक मिला वैभव सम्भले नहीं , इसमें मैं आपकी
कोई गलती की बजाये कांग्रेस की प्रोपेगेंडा मशीनरी
की सफलता मानूंगा , ये मशीनरी 65 साल में कितनी
मारक और परिपक्व हो चुकी है इसका अंदाज़ा आप हाल के
सूटबूट वाली सरकार के सफल जुमले से समझ सकते हैं, ये छवि
सबसे गंभीरता से ली जानी चाहिए क्योंकि ये सबसे
खतरनाक वर्ग है , ये वर्ग दिमाग से नहीं दिल से सोचता है
और एक स्थापित छवि को जल्दी मिटने नहीं देता पर इसमें
फायदा ये भी है की राहुल गांधी की छवि जो "पप्पू" की
बनी हुई है वो भी जल्दी मिटने वाली नहीं , राहुल की ये
छवि मोदी की छवि को होते नुकसान को बेअसर करने में
सहायक होगी !! दस में से छह अंक !!

एक निष्पक्ष भाजपा समर्थक / कार्यकर्ता के रूप में
==
एक वो राजा की कहानी याद आती है जिसे वरदान
मिला था की वो जिसे छु लेगा वो सोने का हो
जायेगा , बदकिस्मती से उसने अपने पत्नी बच्चों को ही छु
लिया , सब सोने के हो गए , मूरत बन गए !! आपके ज्यादातर
सांसदों को भी आपने छु लिया है लगता है , सब मूरत बने हुए हैं
, ज़मीन पर भी और संसद में भी , एक साल पहले जो अभूतपूर्व
वरदान आपको मिला था वो आपके लिए ही मुसीबत
सिद्ध होगा , आप विदेश यात्रायें करें कोई परेशानी नहीं
पर कभी ओचक गाँवों के दौरे भी बनायें , देखें आपकी
योजनाएं आपके सांसद और कार्यकर्ता लोगों तक पहुंचा रहे
या नहीं , देखें उनमे कितना भ्र्ष्टाचार है और कितनी
पारदर्शिता है ? मानता हूँ की प्रधानमंत्री की
जिम्मेदारियां बेहद व्यापक और विस्तृत हैं पर जनतंत्र में
"छवि" एक बहुत महत्वपूर्ण रोल अदा करती है !! स्वच्छ भारत
मिशन में आपके नेताओं का कोई खास सहयोग नहीं रहा ,
रहा भी तो पारम्परिक दिखावपूर्ण खानापूर्ति , ये
डीएनए से जुड़ा प्रश्न है और इस प्रकार की वैचारिक
क्रांति कार्यकर्ताओं और नेताओं में कैसे आये उसके लिए
सोचना होगा !! इसके अलावा पार्टी में कोई असंतुष्ट भी
है तो उसे अपनी बात रखने के मौके क्यों नहीं मिलते ? मैं ये
मानता हूँ की कोई भी पार्टीनिष्ठ परन्तु असंतुष्ट नेता
मीडिया में जाकर अपनी बात रखने को सबसे आखिरी और
असहाय स्थिति से जनित उपाय मानता होगा , क्यों ऐसे
लोगों को लांछन लगाकर जवाब देना ही उचित समझा
गया ? क्यों विनम्रतापूर्वक उनकी आलोचना
शिरोधार्य नहीं रखी गयी ? आखिर ये पार्टी सिर्फ
मोदी और अमित शाह ने तो बनायीं नहीं ? दस में से सात
अंक देना चाहूंगा !!

एक भारतीय के रूप में
===
आपने हरदम हमारा सीना चौड़ा किया है , पूरे विश्व के
अख़बारों में जब भारत का नाम पहले पन्ने पर आता है तो बहुत
अच्छा लगता है , कोयले और स्पेक्ट्रम में ईमानदारी से
नीलामी करवाने और लाखों करोड़ों रूपए सरकारी
खजाने में लाने के लिए आपका बारम्बार आभार ,आपकी
विदेश नीति आज़ादी के बाद सफलतम विदेश नीति में
गिनी जा सकती है , पहले ही साल में गरीबों और
सामान्य लोगों के लिए जनधन योजना , बीमा योजना ,
सुकन्या योजना , स्वच्छ भारत मिशन , शौचालय मुहीम ,
सब्सिडी जमा करने की पहल , उद्योग धंधे वालों को
सरकारी लालफीताशाही से मुक्ति जैसे कदम आपकी
प्रशासनिक श्रेष्ठता के रूप में बरसों बरस जाने जायेंगे !! पर
भ्र्ष्टाचार पर कोई जोरदार हमला नहीं हुआ , बल्कि
लोगों में ऐसा विश्वास ही और प्रबल हुआ के भाजपा
कॉंग्रेस एक दूसरे के विरुद्ध कभी कोई फैसला नहीं लेंगे ,
केंद्रीय योजनाओं में भारी भ्र्ष्टाचार है पर कोई
आक्रामक मुहीम उसे रोकने दिखाई नहीं दी , लोकपाल
कानून है पर लोकपाल की नियुक्ति में इतनी सुस्ती आपकी
नियत पर संदेह का कारण बन सकती है , लोगों में ये भी
धारणा बनी है है की काला धन आएगा भी की नहीं या
आएगा तो ना जाने कब आएगा ? ये आपकी भीषण गलती
ही कही जाएगी की आपने इतने बड़े तकनीकी मुद्दे को
"लोकलुभावन" बनने दिया और SIT बनाने के बाद अब उसपर
कोई गंभीर फॉलो अप नहीं दिखता !! पर ये बात भी सही
है की अभी एक ही साल हुआ है और चार साल में काफी कुछ
किया जा सकता है इसलिए आज भी एक भारतीय के रूप में
आप मेरे सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं , दस में से नौ अंक देना
चाहूंगा !!
कुल अंक 50
प्राप्तांक  31

Sunday, 10 May 2015

माँ....बहुत याद आती है आपकी

मां.... एक दिन के लिए नहीं। हर क्षण के लिए।
इस उम्र में हर दिन कुछ न कुछ संघर्ष किया है। प्रकार बदले, पैमाने बदले, संघर्ष नहीं बदला।
मैं उन नौ महीनों की कल्पना ही कर सकता हूं जब मैं बिना संघर्ष तुम्हारी कोख में आया और रत्तीभर संघर्ष नहीं करना पड़ता था। तुम्हारी कोख में सबसे सुरक्षित था मैं। संघर्ष का दूर-दूर तक नाता नहीं था।
उसके बाद बाहर की दुनिया देखी और संघर्ष शुरू हो गया। आंखे खोलने का संघर्ष, सांस लेने का संघर्ष, खाने-पीने का संघर्ष..... और दिनों दिन संघर्ष का दायरा बढ़ता गया..बढ़ता गया।
निश्चित ही उस संघर्ष से मैं हार मान लेता... लेकिन आप कब मुझे हारते देख पातीं।
सब कुछ सिखा दिया। मैं गलती करता गया,,,,, आप सिखाती गईं।
हर संघर्ष में जीतना सिखाती गईं।
अक्षर सिखाए....शब्द सिखाए.... बोलना सिखाया।
पीना... खाना... चलना और दौड़ना सिखाया।
रुठना, मनाना, गुस्सा करना, जिद करना और प्यार करना भी सिखा दिया।
.... इस दुनिया में खड़े रहना और जूझना सिखा दिया।
फिर आपकी आदत लग गई,मेरा डर समाप्त हो गया क्यों कि पता था कि जब कभी मैं गिरने वाला हुआ आप मुझे संभाल लोगी।मुझे जीतने की आदत आपसे लगी।और जब मैं इस लायक हुआ कि दुनिया की साथ चलूँ तब आप मुझे छोड़ कर चली गईं। और तब मुझे बताया गया कि आपको श्री राम जी ने बुला लिया है और मेरा विश्वास श्री राम जी पर अटल हुआ।जीवन के यथार्थ सत्य के भाग में जब मेरा गमन हुआ जीवन के उस भाग में, मैं गिरने वाला हुआ तो मुझे किसी ने नहीं संभाला लेकिन फिर मेरे जीवन को संभाला श्री राम जी ने।
माँ,

मैं हँसता तो हूँ लेकिन खुश रही रहता क्यों कि आप मेरे साथ नहीं हो।

Saturday, 18 April 2015

एक रहस्य

आइये आज आपको बताते है वो गुप्त रहस्य जिसे उजागर करने वाले अधिकतर लोगो की हत्या की जा चुकी है या फिर उनको गुमनामी की ज़िन्दगी जीने पर मजबूर कर दिया गया है .. . ILLUMINATI अर्थात प्रबुद्ध या सबसे अधिक बुद्धिमान लोगों का समूह .. बहुत से मित्रो को ये भी नहीं पता होगा की आखिर ये इल्लुमनिती है क्या बला??
इल्लुमनिती दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगो का एक सीक्रेट संगठन है, जो की पूरी दुनिया पर कब्ज़ा करना चाहता हैइसके मुख्य उद्देश्य है पूरी दुनिया में बिना किसी बॉर्डर के सभी देशो में एक मुद्रा एक संस्कृति, एक सभ्यता, एक जाति विशेष का एकछत्र साम्राज्य हो, इसके लिए इन्हें जनसख्या पर भी नियन्त्रण करना है, जिसका एक ही एक उपाय है, लोगो का जातीय सामूहिक संहार, फिर चाहे वो प्रथम विश्व युद्ध करवाना हो या द्वितीय या भारत पाक युद्ध या फिर वियतनाम अमेरिका युद्ध, या अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमला, या अब तीसरे विश्वयुद्ध के साथ साथ जल-युद्ध और परमाणु युद्ध की तयारी
इस संगठन पर वर्तमान में यहूदियों और कुछ सीमा तक ईसाईयों का कब्ज़ा है, यहूदियों से इसलिए क्यूंकि अमेरिका में भी उन्ही का दबदबा है और इल्लुमनिती को अधिकतर फण्ड वही से मिलता है,
पूरी दुनिया में इल्लुमनिती का सबसे बड़ा दुश्मन, शत्रु है हिन्दू,
जी हाँ, सनातन धर्म इल्लुमनिती का सबसे बड़ा शत्रु है,
किसी भी देश में कोई भी सत्ता बिना इनके हस्तक्षेप के नहीं चल सकती,
शायद कुछ लोगो को ये बात हजम न हो, पर भारत में कोई भी सरकार चाहे वो आ चुकी है या आने वाली है वो इन्ही के इशारों पर चली है और चलेगी,
इनका सबसे बड़ा प्रोजेक्ट एक और है,एक फिल्म है the resident Evil और भारत में बनी हुई Go Goa Gone, इन सभी में एक ही समानता है, लोगो को वायरस द्वारा अर्द्धमृत कर देना और उनकी बुद्धि पर नियंत्रण करना,इलुमनिती वायरस द्वारा भी माध्यम व् गरीब लोगो का समुहिक संहार करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और इसके लिए उन्होंने लोगो के मन में डर बैठाने के लिए हॉलीवुड और बॉलीवुड का सहारा लिया है, उपर लिखे २ नाम तो केवल एक मोहरा है, लिस्ट काफी लम्बी है,
जिस वायरस पर इल्लुमनिती संगठन अब तक कार्य कर रहा है उसका केवल एक ही तोड़ है और वो है यज्ञ,
यज्ञ न केवल हानिकारण किरणों, गैसों, बल्कि जैविक परमाणु और अन्य रासायनिक हथियारों को आराम से निष्क्रिय कर सकता है, चावल जो की सबसे अच्छा anti-atom पदार्थ है, इसकी यज्ञ में आहुति से पूरा वातावरण परमाणु विकिरण से मुक्त हो जाता है, इसके अतिरिक्त और भी हजारो ऐसे पदार्थ या हवन सामग्री में प्रयोग होने वाले तत्व है जो इनसे मुक्ति दिला सकते है,
इलुमनिती का सबसे मुख्य कार्य इस समय सनातन धर्म को ही समाप्त करना है,
इसके कारण बहुत है पहला सनातन धर्म में अध्यात्म और ईश्वरीय तत्व,
जहाँ अध्यात्म व् ईश्वरीय आभास होगा वहां पर पैशाचिक विचारो का होना असंभव है, सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए ही इस्लाम और ईसाईयत को पुरे देश में इल्लुमनिती द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है, जिस कारण बड़े पैमाने पर मुसलमानों द्वारा धर्मान्तरण, लव जिहाद, दंगे आदि हो रहे है,
इमुलानिती का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय का समर्थन नहीं करना है, केवल अपने लाभ के लिए ये एक मजहब के दुसरे मजहब के विरुद्ध प्रयोग करते है

सबसे पहले इल्लुमिनाती का इतिहास जानिए ,,,,,
गोड (god)कौन है किसी को मालुम नही पर उसने एक बार अब्राहम को पास बूला कर कहा की तूझे और तेरी संतानों को पूरी पृथ्वि आशिर्वाद के रूप में देता हुं । तब से अब्राहम अपने आप को पूरी पृथ्वि का मालिक समजने लगा, और अपने बच्चों को भी बताता रहा ।
अब्राहम जिस जीवन शैली से रहता था उसे यहुदी धर्म कहा गया । कुछ पिढियों के बाद उस के विशाल परिवार वैचारिक हिस्से में बंट गया ।
इसा नाम के आदमी ने दावा किया की मैं गोड की पसंद हुं मै कहता हुं ऐसे जीना है और वो ही हमारा धर्म है, और इसाई धर्म की स्थापना कर दी ।
मोहम्मद नाम का आदमी बोला मै ही खूदा की पसंद हुं, मैं कहुं वो ही धर्म है, और इस्लाम की स्थापना हो गई ।
ऐसे एक संप्रदाय से तीन तीन संप्रदाय पैदा हुए
1
यहुदी
२ इस्लाम
३ इसाई,
और तीनों दावा ठोकने लगे हम लोग ही उपरवाले की पसंद है, हमें ही पृथ्वि भेंट में मिली है, हमे ही उस पर राज करना है ।

Tuesday, 7 April 2015

क्वीन कौन है ?

कुछ खास नही बस इतनी सी है मोहब्बत मेरी .. !!
हर रात का आखरी खयाल और हर सुबह की पहली सोच है वो..,!!

दोस्तों मेरे विभिन्न लेखों पर आप सभी मित्रों का बहुत अधिक प्रेम मिल रहा है। आप सभी के मेल मुझे प्राप्त होते रहते हैं।आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मैं देता हूँ।एक प्रश्न जो अब तक 400 से अधिक मित्र पूछ चुके हैं कि ये क्वीन कौन है ?”


किसी के इस प्रश्न का उत्तर मैं नहीं दे पाया। मित्रों ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मैं आप सभी से कुछ छिपा रहा हूँ। मेरा प्रयास रहता है कि आप सभी से जुड़ कर रहूँ और साथ ही आप सभी को जोड़कर रखने की भी जिम्मेदारी मेरी ही है।
मेरी मोहब्बत का असर तो देखो ..
लोग आजकल मिलते तो मुझसे हैं... बाते उनकी होती हैं.....!!!

कहानी की सार्थकता तभी प्रमाणित होती है जब कहानी का आधार , कहानी के केन्द्र में क्या है यह अंत में पता चले। मेरी क्वीन मेरे जीवन का आधार है। भले ही वह मेरे दुख में मेरे साथ न रहती हो, यह भी होता है कि वह मेरे दुख का कारण बनी हो लेकिन इसके साथ ही एक सच और भी है कि वो क्वीन का ख्याल ही है जो मुझे दुखों को भूलकर संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
दोस्तों ये क्वीन कौन है ये आपको मेरे ब्लाग पर पता नहीं लगेगा इसके लिए आपको मेरा उपन्यास पढ़ना होगा और उसके लिए करना होगा लगभग 2 साल का इंतजार।

"सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का

जो कहता है राम हैं तो नज़र आना ज़रूरी है"

Friday, 3 April 2015

एक और सच से सामना


मत कर मेरे चेहरे से मेरे किरदार का फैसला . .
तेरा वजूद मिट जायेगा मेरी हकीकत ढूँढते- ढूँढते

मैंने कहीं पढ़ा था कि पैर की मोच और छोटी सोच इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती।
मैंने अपने एक ब्लाग में लिखा था कि लोग मुझ पर दोहरा जीवन जीने के आरोप लगाते हैं,मैं आज फिर से उन सभी मित्रों को सार्वजनिक रूप से बता देना चाहता हूँ कि मैं दो नहीं हजारों जीवन जीता हूँ।मेरे जीवन में हजारों लोग हैं,और सभी अपनी व्यक्तिगत बातें मुझसे बताते हैं।लेकिन कभी किसी की बात किसी और से नहीं की। और रही अपनी बात तो मैं इतनी हिम्मत रखता हूँ कि अपने जीवन का पूरा सच और अपने मन के विचारों को एक सार्वजनिक मंच पर लिख सकूँ। मैं क्या हूँ वो या तो मैं जानता हूँ या फिर वो जानते हैं जिन्होंने मुझे सच में समझने की कोशिश की है।मेरे विषय में वो लोग कोई राय न बनाएँ जो मात्र किसी की नजर में अच्छा बनने के लिए किसी के विषय में भी कुछ भी बोल देते हैं।हम जैसे स्वयं होते हैं वैसा ही दूसरो के विषय में सोचते हैं। बचपन में एक कहानी पढ़ी थी जो वर्तमान परिस्थितियों से जुड़ती हुई दिखी। कहानी कुछ इस प्रकार थी-
एक लड़का और लड़की साथ में खेल रहे थे. लड़के के पास बहुत सुंदर कंचे थे. लड़की के पास कुछ टॉफियां थीं. लड़के ने लड़की से कहा कि वह टॉफियों के बदले में अपने सारे कंचे लड़की को दे देगा. लड़की मान गई. लेकिन लड़के ने चुपके से सबसे खूबसूरत दो- तीन कंचे दबा लिए और बाकी कंचे लड़की को दे दिए. बदले में लड़की ने अपनी सारी टॉफियां लड़के को दे दीं. उस रात लड़की कंचों को निहारते हुए खुशी से सोई. लेकिन लड़का इसी सोच में डूबा रहा कि कहीं लड़की ने भी चालाकी करके उससे कुछ टॉफियां तो नहीं छुपा लीं!
 सीखः यदि तुम किसी रिश्ते में सौ-फीसदी ईमानदार नहीं रहोगे तो तुम्हें अपने साथी पर हमेशा शक होता रहेगा..

(आज का ये ब्लाग बहुत पीड़ा में लिखा है अगर कुछ बुरा लगे तो क्षमा करें।)

सब कुछ मिले ज़िन्दगी में तो जीने का क्या मज़ा;
जीने के लिए एक कमी की जरूरत भी जरूरी होती है।

Thursday, 2 April 2015

उनके लिए जिन्होंने मुझे बनाया

जीवन में असली उड़ान अभी बाकी है; हमारे इरादों का इम्तिहान अभी बाकी है; 
अभी तो नापी है सिर्फ मुट्ठी भर ज़मीन; अभी तो सारा आसमान बाकी है।

आज मन कर रहा है उनके लिये कुछ लिखने का जिनके कारण मुझे मेरी विशिष्ट पहचान मिली। मैं आभारी हूँ उन सभी का जिन्होंने वात्सल्य के साथ साथ मुझे दण्ड भी दिया, हलांकि उस समय वो दण्ड बहुत बुरा लगता था लेकिन आज उसका वास्तविक महत्व समझ में आ रहा है।
ना सोचो अकेली किरण क्या करेगी ,
 तिमिर में अकेली ,किरण ही बहुत है!

श्री श्रीकांत जी -मुझे ठीक से याद नहीं लेकिन मेरे बाबा जी बताते हैं कि मेरी शिक्षा आरम्भ होने से पूर्व उन्होंने घर पर पाटी पूजन का कार्यक्रम रखवाया और मेरी जिह्वा पर चन्दन से माँ सरस्वती मंत्र लिखवाया। अगले तीन वर्ष की प्रारंभिक शिक्षा आपके सानिध्य में हुई।आपने बीज को पौधा बनाने में खाद का काम किया।मुझे नहीं पता अब आप कहाँ हैं लेकिन मैं जीवन पर्यन्त आपको नहीं भूल सकता ।

असफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो;
क्या कमी रह गयी है, उसे देखो और सुधार करो;

श्री गोपाल जी- सरस्वती शिशु मंदिर में पढते हुए गणित के प्रति आपने मेरी रूचि को स्थापित किया।यह एक ऐसा विषय है जिससे विद्यार्थी डरते हैं लेकिन आपकी मेहनत के कारण ही मुझे कभी गणित से डर नहीं लगा बल्कि गणित मेरा प्रिय विषय बनकर रहा।जब लखनऊ में कक्षा 9 में पढता था और विद्यार्थियों को पहाड़े याद न करने पर कक्षा में पीछे खड़ा कर दिया जाता था तब मैं बहुत ही गुरूर के साथ पूरी कक्षा में अकेले सीट पर बैठता था, मेरे उस गुरूर की वजह आप थे।

 इक पत्थर की भी तक़दीर संवर सकती है, 
शर्त ये है,की सलीके से तराशा जाए !


श्री शिव नारायण जी- गुरूदेव आपकी मार में छुपा हुआ प्यार मुझे 4 वर्षों के बाद समझ आया।हिंदी की भाषागत अशुद्धियों के लिए जब आप पूरी कक्षा के सामने मुझे पीटते थे तब मुझे एक बात समझ में नहीं आती थी कि कक्षा के 52 विद्यार्थियों में सिर्फ मैं ही क्यों ....लेकिन अब मुझे उसका जवाब मिल गया है, आपने दिया बनाने के लिए मुझ मिट्टी को ही चुना था।मुझे याद है जब मैंने पहली बार अपनी उत्तर पुस्तिका पर एक प्रेरक वाक्य लिखा था,और आपने मेरी उत्तर पुस्तिका प्रधानाचार्य से लेकर प्रत्येक कक्षा में दिखाई थी और तब से मैं प्रत्येक प्रष्ठ पर प्रेरक वाक्य लिखने लगा था।आपने ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्राथमिक शिक्षा वर्ग का प्रशिक्षण दिलाया और संघ के मूल विचार की अनुभूति भी कराई।आज जितनी बार मेरी हिंदी की प्रशंसा होती है उतनी बार आपको प्रणाम करता हूँ।

खुशबू श्रीवास्तव -
तेरे जाने का असर कुछ इस कदर हुआ मुझ पर
कि तुझे ढूढते ढूढते मैंने खुद को पा लिया
अब, जब मैंने सच बोलना सीख ही लिया है तो एक सच ये भी है कि मेरी राइटिंग की वजह तुम हो।जब तुमसे बचपन वाला प्यार हुआ तब मुझे लगा कि तुम्हारे जैसा लिखने की कोशिश करूँ।मैं आज भी तुम्हारे जैसा खूबसूरत नहीं लिख पाता लेकिन I और  K अभी भी बिल्कुल वैसा ही बनाता हूँ जैसा तुम बनाती थी।अवांछित पत्र जो खोले नहीं कल तलक तुमने,सारा विश्व पढ़ रहा उनको......तुमको सूचित हो

श्रीमती पारुल जी- मैम आपने हमेशा एक बड़ी बहन की तरह मुझे समझाया।हमेशा मेरा प्रोत्साहन किया।आपके घर पर जब मैं ट्यूशन पढ़ने आता था और पढ़ाने के बाद अपनी व्यक्तिगत बातें आपसे बताता था और आप मुस्कुराते हुए उन्हें सुनती थीं तभी मेरी आधी समस्याएँ समाप्त हो जाती थीं। मैं अपने जीवन में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग तो नहीं करता लेकिन अंग्रेजी का जितना भी ज्ञान है वो सब आपने दिया है।

श्री नितिन मित्तल जी -मेरे छात्र जीवन के राजनीतिक गुरू। अब तक बहुत से मंचों से बहुत कुछ बोल चुका। बहुत सी तालियाँ,वाहवाही और पुरस्कार भी मिले लेकिन श्रोताओं को मोहित कर लेने वाली बात आज भी मुझमें नहीं आई। जब आप विश्वविद्यालय में खड़े होकर अपना विषय रखते थे तब मन में बस एक ही बात आती थी कि यार इतना अच्छा कैसे.....यार लेकिन लाठियाँ भी बहुत खिलाईं तुमने....

श्री आशीष पाण्डे जी -भाई तुमसे भी बहुत कुछ सीखा है मैंने। कमरे के अंदर मजाक मजाक में भाषण देना,अपनी बात पर अडिग रहते हुए तर्कों के साथ उसे प्रमाणित करके ही मानना, यार गजब प्रतिभा थी। तुम बिल्कुल मेरे जैसे थे जो सोच लिया सब कुछ छोड़कर बस वही करना है। दूसरा कोई नहीं मिला तुम्हारे जैसा भाई।

सृजन में चोट खाता है छेनी और हथौड़ी का,
वही पाषाण मंदिर में कहीं भगवान होता है |


डा. अरुण भगत जी- गुरुदेव मेरे पास वो शब्द नहीं हैं जिनके माध्यम से मैं आपके विषय में कुछ लिख सकूँ।मुझे लेकर आप पर पक्षपात के बहुत से आरोप लगे लेकिन वास्तविकता सिर्फ मैं , आप और ईश्वर जानता है।अवश्य ही मेरे पूर्व जन्म के कुछ पुण्य कर्म रहे होंगे जिसकी वजह से आपका सानिध्य मिला। आपने एक पिता की तरह मुझे मेरे गलत कामों पर डाँटा भी और प्रेम भी दिया।अगर आप न होते तो मैं भी अंग्रेजी की चकाचौंध में खो जाता। जामिया वाली प्रतियोगिता में मेरे वक्तव्य के बाद सभी ने मुझसे कहा कि तुम अच्छा नहीं बोले,कालेज के मंच और राष्ट्रीय मंच में अंतर होता है, उस समय मैं बस एक ही बात सोच रहा था कि मैंने आपका विश्वास तोड़ा है , लेकिन वहीं दूसरी ओर जब मैं रविशंकर प्रसाद जी वाले कार्यक्रम में थोड़ा सा वन्दे मातरम भूल गया तो आपने मुझसे कहा कि बहुत अच्छा प्रयास था। गुरुदेव आपके आशीर्वाद एवं प्रोत्साहन की अपेक्षा जीवन पर्यन्त रहेगी।आपका सादगीपूर्ण एवं सैद्धांतिक जीवन ही मेरे कार्यशैली का आधार रहेगा।


क्वीन -जब से तुमको समझा बस तुममें ही खोता गया। बस इतना ही कहूँगा तुम्हारे लिए कि जो नाम तुमको मैंने दिया है वो यूँ ही नहीं दिया। कौन चाहता है तुम्हें ये सोचकर तुम्हें खुद से मोहब्बत हो जाएगी।
इतने बुरे ना थे हम जो ठुकरा दिया तुमने हमेँ.. 
अपने फैसले पर एक दिन अफसोस तुम्हेँ भी होगा.!!!

इसे नहीं पढ़ा तो कुछ नहीं पढ़ा

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