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Tuesday, 13 October 2015

क्या आप नहीं देंगे इस आंदोलन का साथ


मित्रों आजकल गौहत्या, बीफ पार्टी, पोर्क पार्टी त्यादि विषयों की चर्चाएं जोरों पर हैं। जब इस देश में जब बीफ पार्टी होती है तो कुछ लोग पोर्क पार्टी करने लगते हैं। वे सब यह भूल जाते हैं कि हमारी संस्कृति यह नहीं कहती कि यदि कोई गलत करे तो उसका विरोध करने के लिए हम गलत तरीका अपनाएं। गाय किसी एक धर्म विशेष की है ऐसा नहीं है, गाय का दूध तो प्रत्येक मनुष्य के लिए लाभकारी होता है। ऐसे में गाय को लेकर हिंदू- मुस्लिम करना गलत होगा। हमने तय किया है कि हम सकारात्मकता के साथ इस विषय को उठाएंगे और इसकी शुरुआत लखनऊ से होगी। हम देश के विभिन्न हिस्सों में काऊ मिल्क पार्टी का आयोजन करेंगे. उन पार्टीज में हम गाय के दूध तथा गाय से प्राप्त अन्य उत्पादों के लाभ समाज को बताएंगे। देश में हुए पिछले कुछ आंदोलनों से एक बात तय हो गई है कि आप चुनिंदा लोग कुछ भी कर सकते हैं। हम अपने इस प्रयास में सोशल मीडिया का सहारा लेंगे और आप देखना आपके छोटे से प्रयास से कुछ बड़ा होगा। मैं वादा तो नहीं करता लेकिन इतना जरूर कहता हूं कि अगर हम सब एक होकर कोई लक्ष्य निर्धारित करेंगे तो उस लक्ष्य तक पहुंचने में हमें कोई भी बुरी ताकत नहीं रोक सकती। मुझे आप सब पर विश्वास है और मुझे यह भी पता है कि हमारा यह आंदोलन अवश्य सफल होगा। इस आंदोलन के सफल होने के बाद हम गर्व से कह सकेंगे कि किसी विषय का विरोध सकारात्मक तरीके से भी किया जा सकता है।

मित्रों मैं बहुत ही स्वार्थी किस्म का व्यक्ति हूं। मैं इस आंदोलन से सिर्फ इस लिए जुड़ा हूं कि आज से 20 साल के बाद मेरी बहन का बेटा जब मुझसे पूछे कि मामा जी आज से 20 साल पहले गाय माता को बचाने के लिए आंदोलन चल रहा था तब आप कहां थे? तो मैं उससे नजर मिला कर यह कह सकूं कि बेटा मैं उन गौ भक्तों के साथ मिलकर सोशल मीडिया पर एक क्रांति लाने के लिए प्रयास कर रहा था। मैं उसे बता सकूंगा कि बेटा इस देश के युवाओं ने मेरे साथ, मेरे कंधे से कंधा मिलाकर इस क्रांति में सहयोग किया था।

दोस्तों, आज गौ माता की रक्षा के लिए इस देश के कुछ युवा एकजुट होकर मिल्क पार्टी करना चाहते हैं। उनमें से कई लोगों से मेरी बात हुई, वो सभी लोग बस एक ही बात कह रहे थे कि विश्व गौरव भाई आप देखना इस देश के युवा हमारा साथ देंगे, इस देश के युवा गाय माता से बहुत प्रेम करते हैं लेकिन राजनीति उन्हें एक नहीं होने दे रही। उन्होंने कहा कि इस देश को राजनेता हिन्दू- मुस्लिम में बांट कर देश तोड़ना चाहते हैं लेकिन इस देश का युवा ऐसा नहीं होने देंगे। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि भाई आप देखना 17 अक्टूबर को जब लखनऊ से इस आंदोलन की शुरुआत करेंगे, उस दिन फेसबुक और ट्विटर पर #milkparty टॉप ट्रेंड में चल रहा होगा। मैं नहीं जानता कि ऐसा होगा या नहीं लेकिन मैं यह बात पूरे विश्वास से अवश्य कह सकता हूं कि इस आंदोलन के साथ ईश्वर है और जिस आंदोलन के साथ ईश्वर हो उस आंदोलन को सफल होने से कौन रोक सकता है। मैं आज बस आपसे इतना ही निवेदन करना चाहता हूं कि इन युवाओं का साथ जरूर देना, अगर आज आप इनके साथ नहीं खड़े हुए तो अगले 200 सालों तक कोई युवा गौ संरक्षण के लिए आगे नहीं आएगा।

इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लखनऊ के नितिन मित्तल अपना सब कुछ छोड़कर गौ माता की सेवा के लिए लगने वाले हैं। मैं इस ऊर्जावान युवा को हारते हुए नहीं देख सकता। ये आंदोलन नितिन का व्यक्तिगत आंदोलन नहीं है यह आंदोलन इस देश के प्रत्येक नागरिक का आदोलन है। यह आंदोलन है इस देश की अस्मिता, एकात्मता एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए। इन लोगों को हारने मत देना क्यों कि अगर ये लोग हार गए तो एक बार फिर यह प्रमाणित हो जाएगा कि देश ने राजनीति की गंदी सोच को देश ने स्वीकार कर लिया है। अगर ये लोग हार गए तो तुष्टीकरण की जीत हो जाएगी।
हमारी सरकार से स्पष्ट मांग है कि गौ हत्या पर सख्त कानून बने और गौ संरक्षण के लिए सरकार की ओर से योजनाएं शुरू करके प्रोत्साहन दिया जाए।

इस आदोंलन को सफल बनाने के लिए फेसबुक या ट्विटर पर कोई भी पोस्ट डालें तो उसके साथ #milkparty अवश्य जोड़े।
फेसबुक पर COW MILK PARTY के पेज को लाइक करने के लिए यहां क्लिक करें

हमें ओवैसी और आजम खान जैसे लोगों को यह एहसास दिलाना है कि भारत मां अभी बांझ नहीं हुई हैं। वह अभी भी वीरों को जन्म देती है।
अगले लेख में... मनुष्य जाति के लिए कितनी लाभदायक हैं गौ माता

जय गौ माता    वन्दे भारती






Wednesday, 23 September 2015

फलाह, अगर हिम्मत है तो जवाब दो ताहिर के इस प्रश्न का...

लो अब एक नई मांग- एक मुस्लिम व्यक्ति ने Change.org पर एक पिटिशन लॉन्च करके बकरीद के त्योहार पर सब्जियों पर बैन लगाने की मांग की है। फलाह फैजल नामक इस शख्स ने अपनी पिटिशन में लिखा कि जैन संप्रदाय के त्योहार 'पर्यूषण पर्व' पर देश के कई राज्यों की सरकारों ने कुछ दिनों के लिए मीट पर बैन लगा दिया था इस लिए बकरीद पर सब्जी बैन होनी चाहिए।

फलाह की मांग है कि उनके त्योहार बकरीद पर सब्जियां बैन कर दी जानी चाहिए, क्योंकि उनकी भी 'भावनाएं' हैं। फलाह ने कहा, 'पैगंबर अपने खुद के बेटे का बलिदान देने के लिए राजी थे। मुझे लगता है कि हम सभी एक दिन के लिए सब्जियों का बलिदान दे सकते हैं यानी न खाकर काम चला सकते हैं।' फलाह ने कहा कि रमजान के दौरान मुस्लिम पूरे एक महीने तक रोजा रखते हैं, ऐसे में शाकाहारी एक दिन तो आराम से 'भूखे' रह सकते हैं। अपनी इस व्यंग्य भरी पिटिशन में फलाह ने सब्जियों पर बैन न लगाए जाने की स्थिति में एक विकल्प की पेशकश भी की। फलाह ने कहा, 'मेरी वैकल्पिक मांग यह है कि देश का हर नागरिक अपने धर्म की मान्यताओं की परवाह किए बगैर बकरीद के दिन मटन (बिरयानी) खाकर हमारे इस त्योहार में हिस्सा लें।' फलाह की इस आधारहीन पिटिशन को अब तक 500 लोगों का समर्थन मिल चुका है, लेकिन इसे 490 लोगों के समर्थन की जरूरत और है।

मुझे समझ में नहीं आता कि ये देश तोड़ने वाले लोग आखिर इस देश में जिन्दा क्यों हैं। क्या इनके खुदा ने इनको विवेक नाम की कोई चीज नहीं दी है। ये लोग आखिर क्यों देश की एकता, अखंडता और एकात्मता के साथ खेल रहे हैं। क्यों इन्हें राष्ट्रीय समरसता से कोई मतलब नहीं। आखिर ये ऐसी मांगे करके प्रदर्शित क्या करना चाहते हैं?

मित्रों वास्तव में बहुत पीड़ा होती है जब ऐसी खबरें सामने आती हैं। जब विभिन्न प्रदेशों की सरकारों ने जैन संप्रदाय के त्योहार 'पर्यूषण पर्व' को ध्यान में रखते हुए मीट पर बैन लगाया था तो मेरी अपने एक मुस्लिम मित्र से इस विषय पर चर्चा हुई। उस मित्र का नाम ताहिर है। ताहिर ने मुझसे कहा कि विश्व गौरव भाई आप मीट नहीं खाते हो और जब हमारे साथ खाना खाते हो तो हम भी मीट नहीं खा पाते, लेकिन ऐसा करके आपके चेहरे पर जो संतुष्टि दिखती है उससे मुझे बहुत सुकून मिलता है। लेकिन उसकी इस बात से मुझे जो सुकून मिला उसे मैं प्रदर्शित नहीं कर सकता।

अभी फलाह की मांग की जानकारी मिलने के बाद मैंने ताहिर को फोन किया तो उसने कहा कि भाई हमको मीट न मिले तो हम सब्जी खा सकते हैं लेकिन मुझे पता है अगर आपको सब्जी न मिले तो आप भूखे रहना ज्यादा पसंद करेंगे। उसने कहा कि जिसने ये मां की है कि सब्जी बैन कर दो उससे कहो कि जैन समाज ने एक दिन मीट बैन करने की मांग की थी और वो जीवन पर्यन्त मीट नहीं खाते, क्या फलाह भी एक दिन सब्जियों पर बैन लगा देने से जीवन भर मुस्लिम समाज के द्वारा सब्जी न खाने की जिम्मेदारी लेता है।

मैं ताहिर के इस प्रश्न को फलाह से पूछना चाहता हूं। ऐसे मुस्लिम मित्रों को पाकर मैं स्वयं को धन्य मानता हूं....
वन्दे भारती

इसे नहीं पढ़ा तो कुछ नहीं पढ़ा

मैं भी कहता हूं, भारत में असहिष्णुता है

9 फरवरी 2016, याद है क्या हुआ था उस दिन? देश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में भारत की बर्बादी और अफजल के अरमानों को मंजिल तक पहुंचाने ज...