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Tuesday, 26 April 2016

'ऑड-ईवन' पर देश के मन की बात सुनिए मोदीजी!

किसी ने सच ही कहा है कि सत्ता का नशा हर तरह के नियम, कायदे और कानून भुला देता है। कुछ ऐसा ही हाल वर्तमान समय में भारत के नेताओं का हो चुका है।kejriwal देश की राजधानी में जब हमारे ‘माननीय’ ही नियमों को तोड़ने से परहेज नहीं करते तो एक सामान्य व्यक्ति से यह अपेक्षा कैसे की जा सकती है कि वह नियमों का पालन करेगा? कल कुछ सांसदों ने ऑड-ईवन नियम तोड़ा। किसी ने नियम तोड़कर माफी मांगी तो किसी ने दिल्ली के सीएम केजरीवाल को मनोरोगी की संज्ञा दे दी। क्या राजनीति ऐसी होनी चाहिए? क्या अपनी विपक्षी पार्टी को नीचा दिखाने का यही तरीका होना चाहिए? क्या देश और समाज हित में कोई प्रयोग किया जा रहा है तो उस प्रयोग का समर्थन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नहीं किया जाना चाहिए?
दिल्ली प्रदेश में बीजेपी, आज विपक्ष की पार्टी है। विपक्ष का काम सत्ता का विरोध करना नहीं होता है बल्कि विपक्ष का काम सत्ता को समाज हित में नए रास्ते दिखाने का होता है। विपक्ष का काम सत्ता को गिराने का नहीं होता बल्कि विपक्ष का काम होता है कि जब सत्ता लड़खड़ाए, तो विपक्ष उसे एक नया विकल्प दे। पीएम नरेन्द्र मोदी ने जनधन योजना के रूप में इसी प्रकार का एक प्रयोग किया था, वह प्रयोग सफल भी माना जा सकता है। लेकिन एक बार कल्पना करिए कि यदि 31 प्रतिशत वोट पाकर सरकार में आई एनडीए की सभी योजनाओं-परियोजनाओं का विरोध अन्य सभी विपक्षी पार्टियां करने लगें तो क्या ये योजनाएं सफल होंगी। दिल्ली में ऑड-ईवन एक प्रयोग है, हो सकता है कि इससे कोई खास फर्क न पड़े, लेकिन क्या इस परिकल्पना के चलते इस प्रयोग को किया ही न जाए! जब कई देशों में इस नियम के सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले हों तब मात्र अहंकारवश दलगत राजनीति से प्रेरित होकर नियमों का उल्लंघन करना बीजेपी जैसी पार्टियों को शोभा नहीं देता।
vijay goel
ऑड-ईवन का विरोध कर नियम तोड़ते बीजेपी के विजय गोयल।
देश के प्रधान ने जब लोकसभा में कहा, ‘हम (सरकार) चाहते हैं कि विपक्ष हमारे साथ मिलकर काम करे।’ तो मुझे लगा कि चलो कोई तो है जो पक्ष-विपक्ष के सामंजस्य के साथ कुछ अच्छा करना चाहता है। लेकिन यही अपेक्षा एक विपक्ष के रूप में इस देश को बीजेपी से भी है। संभव है कि नियम तोड़ने वाले हमारे ‘माननीयों’ को ऑड-ईवन के विषय में जानकारी ना हो और वे गलती से गलत नंबर वाली गाड़ी ले आए हों लेकिन क्या नैशनल मीडिया पर छाए रहने वाले एक विषय के बारे में सांसदों को जानकारी न होना, उचित है? कितना अच्छा होता यदि हमारे पीएम साहब कम से कम एनडीए सांसदों को ऑड-ईवन का पालन करने के लिए सार्वजनिक रूप से कहते।
बीजेपी के दृष्टिकोण से केजरीवाल में लाख बुराइयां होंगी लेकिन इस देश के राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि कोई भी सरकार जब कोई नियम अथवा योजना लाती है, तो समाज हित के लिए ही लाती है। दिल्ली की जनता ने ऑड-ईवन को स्वीकार किया है ऐसे में किसी के द्वारा भी बिना किसी आधार के इसका विरोध करना राजनीति के निम्नतम स्तर को दर्शाता है। अच्छे उद्देश्य के साथ किए जा रहे प्रयोग पर देश के सभी दल एक होकर काम करें तभी ‘भारत माता’ की जय होगी। किसी से जबरदस्ती एक नारा लगवाकर मां भारती की ‘जय’ नहीं हो सकती।
Modiएक सकारात्मक प्रयोग पर सभी का समर्थन मिलना, एक नई तरह की राजनीति का जन्म होगा। सत्ता, समाज कार्य का साधन है, यदि उसे साध्य मान लिया जाएगा तो निश्चित ही समाज हित नहीं हो सकता। साध्य तो समाज हित ही होना चाहिए। देश की राजनीति में परिवर्तन परम आवश्यक है। देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक सिंहासन पर बैठने वाले व्यक्ति का दायित्व है कि वह इस राजनीति में परिवर्तन के लिए नींव पूजन करे। नए प्रयोग में नुकसान हो सकते हैं लेकिन उन नुकसानों के डर के चलते यदि प्रयोग न किए गए तो देश की हालत बद से बदतर हो जाएगी और भविष्य इसके लिए सभी नकारात्मक प्रवृत्ति वाले, दलगत राजनीति से प्रेरित नेताओं को ही अपराधी मानेगा।

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